घटिया अनाज के मामले में घिर गए मामा शिवराज?
करोना या कोविड-19 से निपटने के लिए देश भर में लगाए गए लॉकडाउन के दौरान मध्य प्रदेश सरकार ने दावा किया था कि गरीबों की मदद के लिए पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन के माध्यम से बेहतरीन काम हुआ लेकिन इस तरह की आप मंडला और बालाघाट में पूरी तरह से पोल खुल गई है और यह पोल खोल रही है केंद्र सरकार की कंजूमर अफेयार्ज मिनिस्ट्री ने मिनिस्ट्री ने मध्य प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर जताया है कि मंडला और बालाघाट में pds के माध्यम से गरीबों को वितरित किया जा रहा है वह जानवरों के खाने लायक चावल है इंसानों के खाने के लायक चावल तो कतई नहीं है कंजूमर अफेयार्ज मिनिस्ट्री ने बताया है कि वहां से 32 जगहों से इस के सैंपल लिए गए हैं इन सैंपल की जांच नेशनल ग्रेन एनालिसिस लाइब्रोरिटी मैं कराई गई है इस लेबोरेटरी ने साफ कहा है कि यह जो चावल मंडला और बालाघाट में दिया जा रहा है को जानवरों के खाने लायक नहीं हैं मध्य प्रदेश सरकार की नींद भी नहीं टूटी है मध्यप्रदेश के नागरिक आपूर्ति मंत्री बिसाऊ लाल का कहना है कि उनके पास इस तरह का कोई पत्र नहीं आया है और जैसे ही पत्र आता है तो जो दोसी अधिकारी है उन पर कार्यवाही की जाएगी कांग्रेस ने भी दबी जुबान में सीबीआई जांच की मांग की है क्योंकि अभी यह पता नहीं कि यह घोटाला कब से चल रहा है क्योंकि शिवराज सरकार अभी मार्च में बनी है।

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